sex stories in hindi

hindi sex stories

मेरी कामुक नौकरानी- 1

आजकल शहर की भागती दौड़ती जिंदगी में समय मिलना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। मैंने भी अपने बीवी से कहा घर में कोई नौकरानी रख लेते हैं। मेरी बीवी भी काम पर जाती थी। तुम दोनों के पास ही समय नहीं रह पाता था। क्योंकि ऑफिस आने के बाद थकान बहुत हो जाती थी। जिसकी वजह से मैं काफी चिड़चिड़ा भी हो गया था। क्योंकि मैं अपनी बीवी को अच्छे से चोद भी नहीं पाता था। जिसकी वजह से हमारे बीच में बहुत झगड़े होने लगे थे। कई बार तो हमारे तलाक की नौबत आ चुकी थी। पर फिर भी हमारे घरवाले हमें समझा देते थे। और हमारे बच्चों का हवाला दे देते थे। लेकिन मजा नहीं आ रहा था। ऐसा लग रहा था बस जबरदस्ती चल रही हो लाइफ।

loading...

ना बीवी बात अच्छे से करती थी ना खाना बनाती थी। मुझे मेरे ऑफिस के दोस्त ने सलाह दी हमारे यहां पर भी पहले यही समस्या थी मेरी और मेरी बीवी की भी नहीं बनती थी तो हमने घर पर एक नौकरानी रख ली। अब हमारा झगड़ा कम होता है और जिंदगी पहले से थोड़ा ठीक है। मैंने भी अपनी बीवी को कहा तो वह भी मान गए। तो हमने एक नौकरानी रख ली जिसका नाम सुनीता था। सुनीता की उम्र यही कोई 30 32 का आसपास रही होगी। सुनीता का पति नहीं था।  मेरी बीवी ने सुनीता को बुलाया और पूछा क्या-क्या कर लेती हो। सुनीता बोली मेमसाहब घर का सारा काम कर लेती हूं। पगार टाइम पर चाहिए। मेरी बीवी बोली टाइम पर मिल जाएगी। उसकी चिंता मत करो। टाइम पर पगार मिल जाएगी। सुनीता भी खुश हो गई बोलि मैम साहब धन्यवाद, कल से आ जाऊंगी काम पर और वह चली गई।

हमने भी पास के अग्रवाल जी से पूछा कि सुनीता काम कैसे करती है उन्होंने कहा कि हमारे यहां 5 सालों से थी। पर आप हम फॉरेन शिफ्ट हो रहे हैं। इसलिए हमने उसको बोला कहीं और देख लेना काम हमारे यहां तो अच्छे से पिछले चार-पांच सालों से काम किया है। हम भी आश्वस्त हो गए और मेरी बीवी भी खुश थी। क्योंकि वह भी बहुत थक जाती थी काम से इस वजह से चिड़चिड़ी रहती थी। सुनीता अगले दिन से काम पर आ गई। सोमवार का दिन था उसने सुबह नाश्ता बनाया फिर हम लोगों के लिए टिफिन बनाया। और हम लोग नाश्ता करके  टिफिन लेकर आपने अपना ऑफिस को चले गए। मैंने अपनी बीवी से कार में पूछा अब तो खुश हो। उसने भी मुस्कुराकर  जवाब दिया हां खुश हूं। मुझे भी लगा अब ठीक है सब मैं भी रात को आया तब तक मेरी वाइफ घर पहुंच चुकी थी। मैं भी आज अपनी वाइफ के लिए गिफ्ट लेकर आया था। जो कि मैंने रात का डिनर होने के बाद उसको दिया। जैसे ही  मेरी बीवी ने गिफ्ट खोला उसने कहा जी यह क्या लाए हो। मैंने भी एकदम से जवाब दिया पेंटी ब्रा है।

मैंने अपनी बीवी से पूछा क्या तुम्हें अच्छा नहीं लगा नहीं ऐसी कोई बात नहीं है। आज बड़े टाइम बाद तुम रोमांटिक हुए हो। और फिर मैंने अपने बेडरुम की लाइट बुझा दी और मेरी बीवी ने वही पैंटी ब्रा पहने। मुझे भी बहुत खुशी हुई मेरे अंदर का बकचोद जाग गया था। मैंने भी अपनी बीवी के मुंह में अपना लोड़ा छोड़ दिया। फिर उसकी गांड पर सरसों का तेल लगाया और उसकी गांड मारी। क्योंकि उसने भी मेरी बहुत मारी थी। मैंने सारा गुस्सा उसके गांड में उतार दिया। जो कि मेरे वीर्य के रूप में बाहर निकला। और मैंने उसके मुंह में उड़ेल दिया। मैंने बहुत समय बाद रात को उसकी गांड ली थी। कब से मानो मेरे अंदर का मर्द सोया पड़ा था। जैसे आज जाग गया हो। मेरी बीवी सो गई। अपनी गांड मरवा कर। फिर अगली सुबह की बात है मेरी बीवी ऑफिस निकल चुकी थी। उसको जल्दी जाना था। बच्चे भी स्कूल निकल चुके थे। सुनीता ने आवाज लगाई साहब नाश्ता कर लो मैंने कहा थोड़ी देर में करता हूं।

सुनीता ने कहा ठीक है मालिक मैं कमरे की सफाई कर देती हूं। मैंने कहा ठीक है तुम कमरे की सफाई कर दो आज मैं थोड़ा लेट से जाऊंगा। सुनीता सफाई करने लगी जैसे ही वह मेरे बेडरुम में गई वहां पर जो मैंने बीवी को पेंटी ब्रा गिफ्ट दिए थे वह पढ़े थे। उसने वह देखा और पेंटी ब्रा समेटने लगी। इतने में मैं भी बेडरूम में चले गया क्योंकि मुझे ऑफिस का कोई प्रोजेक्ट करना था इसलिए मैं अपना लैपटॉप लेने बेडरूम में चला गया। जैसे ही वहां देखा तो सुनीता पैटी ब्रा संभाल रही थी रही थी। मैंने देख कर भी अनदेखा कर दिया। बिस्तर पर मेरा माल भी गिरा हुआ था।फिर मैंने अपना ऑफिस का काम किया। और अपने डाइनिंग टेबल पर नाश्ता करने लगा इतने में सुनीता ने भी साफ सफाई कर चुकी थी। तो मैंने सुनी तो को पूछा काम हो गया उसने कहा जी मालीक काम हो गया है। फिर मैंने सुनीता को पूछा कौन-कौन है घर में उसने कहा दो बेटियां हैं। और पति को मरे 2 साल हो चुके हैं। फिर मैंने बातों ही बातों में उससे पैनटी बरा वाली बात पूछी ली। सुनीता थोड़ा शरमाई बोलो मालिक क्या बोलूं।

मेरा हरामी आदमी अंदर का जगा हुआ था। बीवी की गांड मारने के बाद मैंने कहा शरमाओ मत मैं तुम्हारे लिए ले आऊंगा। सुनीता बोली अरे हमारी औकात नहीं है। साहब रहने दो मैंने सुनीता को बोला साहब मत बोलो दिलीप नाम है मेरा। सुनीता भी भाप गई थी मेरे इरादों को उसकी भी 2 साल से ठरक बुझी नहीं थी। उसने कहा ले आना दिलीप। मुझे ऑफिस के लिए लेट हो रही थी फिर मैं ऑफिस के लिए निकल पड़ा। शाम को ऑफिस से लौटते वक्त मैंने एक ब्रा पेंटी उसी दुकान से ली जहां से मैंने अपनी बीवी के लिए ली थी। और उस रात भी मैंने अपनी बीवी की गांड लाल की। फिर अगले सुबह मेरी बीवी ने कहा क्या तुम ऑफिस नहीं जा रहे हो आज मैंने कहा जाऊंगा पर थोड़ा रुक कर जाऊंगा। उसने कहा क्या तुम मुझे मेट्रो स्टेशन तक ड्रॉप कर दोगे।

मैं कहां 5 मिनट रुको बस फिर चलते हैं। मैं अपनी बीवी को मेट्रो स्टेशन ड्रॉप करके घर लौटा। और मैं कमरे में गया मैंने अपने बैग से पैनटी बरा निकालें और बिस्तर पर रख दिया। फिर रोज की तरह सुनीता मेरे कमरे में गई। उसने वह पैनटी बरा वहीं पर देखें। मैं सुनीता के पीछे पीछे अपने कमरे में गया। मैंने सुनीता को पीछे से पकड़ लिया। सुनीता की गांड की उभार मेरे लोड़े को छू रही थी। उसके मोमे  मैं कसावट थी जैसे सदियों से किसी ने हाथ भी ना फिरा हो। वह छटपटा कर मेरी बाहों से निकल पड़ी। शक्त आवाज में बोली यह क्या कर रहे हो। मैं मालकिन को बता दूंगी। मैंने कहा बता देना। अब तो और भी मजा आने वाला था। मैंने कहा तुम्हारे लिए पेंटी ब्रा लाया हूं पहन लो। उसने गुस्से में कहा मुझे नहीं पहनना। मैंने अपने पर्स से 2000 का नोट निकाला यह लो इसको रखो। उसने मना कर दिया मैंने कहा और चाहिए उसने कहा नहीं मैंने 2000 को और नोट निकाला। वो मान गई और और बोली ठीक है। फिर उसने मेरे सामने अपने सारे कपड़े उतार दिए। मैंने कहा जो तुम्हारे लाया था वह तो पहन कर आओ। और उसने पहने और आ गई। बोली कैसे लग रहे हो मैंने कहा तुम्हारी मालकिन से भी सुंदर।

अब क्या था मेरे लोड़े का समय आ गया था। मैंने अपनी बेल्ट निकाली और सुनीता की गांड पर जोर जोर से मारने लगा जब तक की लाल नहीं हो गई। अब क्या था सुनीता ने भी मेरे लोड़े को अपने मुंह में ले लिया बोली कितना सख्त और कड़क है आपका। फिर मैंने उसकी चुचियों को चूसना शुरु किया। जो की बहुत नुकीले थे। फिर मैंने सरसों की बोतल से तेल लिया। और सुनीता की गांड में अपना लोड़ा फिट कर दिया। गांड बहुत टाइट थी उसकी फिर बोली तुमने तो मजा दिला दिया। उस दिन मैंने उसकी बुंड 6 बार फाड़ी। उसकी आवाज निकल रही थी। बोलने लगी किस हप्सी से पाला पड़ गया। मेरा भी 12 इंच का है। गांड फट गई थी उसकी मैंने उसको अपने माल से नहला दिया था। जगह जगह गिरा के रख दिया था। उस दिन मैंने उसकी बहुत ठुकाई की। सुनीता ने कहा मैं नहा कर आती हूं मैंने कहा ठीक है नहा लो उसके नहाने के बाद मैं भीनहा गया था। फिर मैं अपने ऑफिस के लिए निकल पड़ा। अगले दिन सुनीता काम पर नहीं आई। मुझे लगा शायद अब आएगी नहीं कभी भी।

उस दिन मेरी बीवी नहीं खाना बनाया क्योंकि सुनीता के पास फोन नहीं था इसलिए उसे संपर्क नहीं हो पाया। फिर मैं रोज की तरह ऑफिस से घर लौट आया शाम को आज रात को मैंने अपनी बीवी की फिर से गांड मारी। जब अगले दिन सुबह उठा तो देखा सुनीता आई हुई थी काम पर मेरी बीवी ऑफिस निकल चुकी थी। मैंने पूछा कल क्यों नहीं आई थी काम पर उसने कहा दिलीप तुमने इतनी ठुकाई की मेरी काम पर कहां से आती गांड के गूदे में दर्द हो रहा था। तब से मैं सुनीता और अपनी बीवी की गांड मारता हूं अब मेरे जीवन अच्छे से चल रहा है।

0Shares
admin
Updated: October 8, 2018 — 5:37 am

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

sex stories in hindi © 2018 Frontier Theme
error: Content is protected !!