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खूबसूरती और बद्सुरती-17

antarvasna अविनाश चलते हुए सुहानी के पास गया और उसे अंधे से पकड़ के उसके माथे को चूम लिया….

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अविनाश:- im प्राउड ऑफ़ यू सुहानी…

और उसने सुहानी को गले लगा लिया। सुहानी क्कोंकुच समझ नहीं आ रहा था की वो क्या कहे। नीता और सोहन ये देख के हैरान थे पर संभल गए थे। वो बड़े चाव से गाडी देखने लगे। अविनाश सब पडोसी को बुला के मिठाई देने लगा। सुहानी अपने पापा को ऐसे खुश देख के रोमांचित हो रही थी अविनाश ने आज पहली बार उसे प्यार से गले लगाया था…नीता ने गाडी की पूजा की…फिर सब मिलके गाडी में घुमाने गए….सुहानी बस अविनाश को देखे जा रही थी।

सोहन भी खुश था…

सोहन:- दीदी मुझे दोगी न कार चलने के लिए…कभी कॉलेज जाने के लिए…सोहन घर में आते ही सुहानी के पास गया और पूछा।

सुहानी:- नहीं बिलकुल नहीं…

सोहन:- प्लीज दीदी…

सुहानी:- नहीं…मैंने तुझे कितनी बार कहा की मुझे अपने बाइक पे शॉपिंग लेके चल या फिर कही और कोई काम से तब तो तुझे शरम आती थी मेरे साथ बाहर आने में…अब मैं क्यू दू तुम्हे…

सोहन:-मम्मी पापा…प्लीज देखिये दीदी मुझे…

अविनाश:- तुम पहले अपनी पढाई पे ध्यान दो…और खुद सुहानी जैसे बड़ी कंपनी में जॉब हाशिल करो और खुद की कार लो और उसे चलाओ…

सोहन को गुस्सा आया और प्पेर पटकते हुए चला गया…नीता अविनाश का बदला हुआ रवैया देख खुश थी।

अविनाश सुहानी के पास गया उसके कंधे पे हाथ रखा और …

अविनाश:- बेटा आज सच में मैं बहोत खुश हु…

सुहानी:- पापा….

सुहानी कुछ बोल नहीं पा रही थी…

अविनाश:- आज जब सब प्पड़ोसि तुम्हारीबतारीफ कर रहे थे तुम सोच नहीं सकती मुझे क्या महशुस हो रहा था। थैंक यू बेटा…अविनाश ने सुहानी को कस के गले लगा लिया…सुहानी भी भावनाओ में बहती चली गयी और वो भी अविनाश से लिपट गयी….

नीता बाप बेटी को ऐसे गले लगे हुए देख के बहोत सुकून महशुस कर रही थी…आज पहली बार वो ऐसा कुछ देख रही थी….उसकी आँखों में आंसू आ गए…सुहानी भी अपने आंसू रोक नहीं पायी….मगर अविनाश ककए मन में कुछ और ही चल रहा था…सुहानी जब उसने पहली बार गले लगया तो सुहानी की चुचिया उसकी छाती पे दब गयी….उसे स्वर्ग के भांति अनुभूति हुई….और अब जब उसने सुहानी गले लगया था तो थोडा और कसक्के गले लगया था….उसका लंड खड़ा होने लगा था…

अविनाश:- मन में…उफ्फ्फ मेरा लंड तो खड़ा होने लगा…कही सुहानी को अहसास न हो जाये….उफ्फ्फ लेकिन क्या मस्त चुचिया है उम्म्म्म्म अपने छाती पे दबती हुई कितना मजा आ रहा …

अविनाश और सुहानी अलग हुए…पपहलि बार सुहानी को कुछ नहींलग लेकिन इसबार सुहानी अविनाश का टच समझ रही थी….उसे थोड़ी शरम आ रही थी की अपनी मम्मी के सामने वो अपने पापा से ऐसे गले लगे हुए कड़ी थी….

सब मिलके खाना खाया….आज सुहानी के घर का माहोल कुछ अलग ही था…सिर्फ सोहन ही था जो खुश नहीं था।

सब लोग अपने अपने कमरे में सोने चले गए। सुहानी बेड पे लेटे। लेटे सोचने लगी “”आज पापा कितना खुश थे…आज वो मेरी अहमियत समज गए…लेकिन क्या वो मेरी कामयाबी से खुश थे या सिर्फ मेरे साथ अच्छा व्यव्हार करने का दिखावा कर रहे है ताकि वो मुझे चोद सके?? क्यू की उनकी आँखों में मैंने वासना देखि है…उनका वो छूना…मुझे गले लगाना और मेरी पीठ पे उनके घूमते गए हाथ…साफ़ साफ़ मुझे समझ आ रहा था…वो नार्मल नहीं था…लेकिन इसमे उनकी गलती नहीं है मैंने ही तो उनको अपना जिस्म दिखाया था…अब अगर वो मेरी तरफ सेक्सुअली अट्रैक्ट हो चुके है तो अब मुझे क्या करना चाहिए… मैं इतना क्यू सोच रही हु…मैं तो बस उनको ये साबित करना चाहती थी की मैं सिर्फ दिखने में अछि नहीं हु बाकी चीजो में मेरी बराबरी बहोत कम लोग कर पाते है…ये सब तो सही है ..पर अब आगे क्या?? क्या वो सच में मुझे चोदना चाहते है….पर क्यू?? मैं तो उनकी बेटी हु…समीर ने कहा था की ये सब होते रहता है…क्या सच में होता है…होता ही होगा…वरना उस दिन पापा क्यू मुझे खिड़की से देखते? और रोज भी बीएस मुझे घूरे जाते है…आज भी कैसे मेरी चुचियो को अपने सीने पे दबा रहे थे…देखते है क्या होता है अगर वो मर्यादा छोड़ के मुझे पाना चाहते है तो मैं भी पीछे नहीं हटूंगी…शायद इसी बहाने से मुझे उनका प्यार मिल जाय जिसके लिए मैं 23 सालो से तरस रही हु…”””

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