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खूबसूरती और बद्सुरती-16

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अविनाश:- मैं ये सब क्या सोच रहा हु?? बाप हु तो बेटी की चिंता रहेगी..लेकिन कल तक मुझे उसकी कोई चिंता क्यू नहीं थी…आज अचानक से….मैं ये सोच के ही क्यू जलन महसूस कर रहा हु की वो किसी और से चुदवा ने वाली है…ऐसा सेक्सी जिस्म चोद के तो कोई भी बाग़ बाग़ हो जाएगा…उसकी चिक्नी सावली चूत को चाट के पागल हो जाएगा….उसकी भरी हुई मांसल गांड पे लंड रगड़ने में कितना मजा आएगा…उसके काले गोल बड़े निप्पल को तो कोई भी घंटो तक चूसता रहेगा…उफ्फ्फ अह्ह्ह्ह और उसकी बड़ी बड़ी चुचियो को मुट्ठी में लेके दबाने को मिले तो जन्नत मिल जाए…ये..ये मुझे क्या हो रहा है…मैं ऐसे पागलो की तरह क्यू सोच रहा हु…वो तो मैं बस कल्पना कर रहा था…बस मैं ये सोच रहा था की वो जवान है उसे बस कोई धोका ना दे…

अविनाश अजीब कश्मकश में था…एक तो वो समझ नहीं पा रहा था की सुहानी के प्रति उसके मन वासना उमड़ रही है या चिंता…क्यू की कही कोने में उसे पता था की कल तक उसे सुहानी की कोई फिकर नहीं थी क्यू की वो बदसूरत थी…कोई उसे देखता भी नहीं था…उसका कोई लड़का दोस्त भी नही था..लेकिन जब आज उसने अपनी आँखों से सुहानी का मादक जिस्म देखा तो उसे लगने लग गया की कोई उसे भोग ना ले…ये एक बाप की चिंता थी…मगर इसके साथ उसके मन में जो भाव उमड़ रहे थे वो वासनामय थे…उसके लिए भी कुछ कारण था…नीता और उसके बिच कई महीनो से सेक्स नहीं हुआ था…नीता सेक्स में शुरू से ही कोई रूचि नहीं रखती थी…उसके अविनाश एक बहोत ही कामुक पुरुष था…लेकिन शादी के बाद अपनी बीवी की सेक्स प्रति बेरुखी देख के उसका भी मन धीरे धीरे सेक्स के प्रति उदासीन होते गया…पर उसने कभी बाहर अपनी आग शांत करने की कोशिस नहीं की…वो अंदर ही अंदर उसे दबाता गया…लेकिन आज सुहानी को ऐसे देख वो दबा हुआ ज्वालामुखी सक्रीय होने लगा था….शायद बहोत जल्द ही ज्वालामुखी दहक उठे….

 

उस दिन के बाद अविनाश का सुहानी की तरफ देखने का नजरिया ही बदल चूका था….सुहानी जो अब मॉडर्न और रिवेलिंग कपडे पहनने लगी थी …जिसमे से झांकता उसके शारीर के अंग कू देख के उनका आँखों से ही रसपान करने लगा था…उसका बहोत मन करता की वो सुहानी के पास जाए उससे बाते करे…उसे छुए पर उसने कभी *ऐसा कुछ नहीं किया था इसकी वजह से उसके मन में एकक अपराधिक भावना ने जन्म ले लिया था….उसका गिल्ट उसे ही खाये जा रहा था…..सुहानी का बेहवियर भी अब कुछ अलग ही हो गया था…वो उसके भाई और पापा को जितना जादा हो सके उतना इग्नोर कर रही थी और ऊपर से ये जता भी देती थी की वो इग्नोर कर रही है….पर अविनाश इन सब के बावजूद इसी फ़िराक में रहता था की कब उसे सुहानी की चुचिया और गांड का जी भर के दीदार हो जाय….सुहानी भी अब धीरे धीरे अविनाश की नजरे समजने लगी थी….उसे ये पता होने लगा था की वो जब भी आसपास होता था तब चुपके चुपके उसे हो घूरता रहता….

एक दिन सुहानी ऑफिस जाने से पहले नास्ता कर रही थी….अविनाश सामने सोफे पे बैठ के पेपर पढ़ रहे थे…तभी सुहानी आचार का डिब्बा लेने के लिए कड़ी हुई और सामने की तरफ झुकी…तभी अविनाश की नजर उसपे पड़ी…उसके टॉप के खुले गए बटन में से आधे से जादा चुचिया अविनाश को दिखाई देने लगी…अविनाश का मुह खुला का खुला रह गया…तभी सुहानी की नजर उसपे पड़ी जो उसकी अदनंगी चुचिया देखने में व्यस्त था….सुहानी ने जब देखा उसके चहरे पे एक विजयी मुस्कान दौड़ गयी….

सुहानी:- मन में” ह्म्म्म्म देखा कैसे मैंने इनको दीवाना बना दिया है….एक हफ्ता हुआ है अभी जब से मैंने इनको अपना जिस्म उस रात को दिखाया है तब से मेरी तरफ अट्रैक्ट हो चुके है…हमेशा मुझे घूरते रहते है…सच कहा था समीर ने अगर मैंने अपनी बॉडी भाई और पापा को दिखाई तो वो भी मुझे चोदने के लिए तड़प उठेंगे…लेकिन क्या मैं ये सही कर रही हु…क्या सच में मैं इनसे चुदवाना चाहती हु?? सही गलत मुझे नही पता…मैं बस इनको अपने पीछे पीछे दौड़ना चाहती हु….

 

सुहानी ने उस दिन जानबुज के खिड़की खुली राखी थी क्यू की उसे पता था खाना खाने के बाद अविनाश सिगरेट पिने के लिए पीछे आते है…और जैसे ही उसे अविनाश की आहट सुनाई दी उसने अपना काम शुरू कर दिया।

सुहानी भी अजीब कश्मकश में थी…उसे पता था वो जो कर रही है वो गलत है पर उसके पास दूसरा कोई रास्ता नहीं था…उसे बस लोगो को खासकर के उसके पापा और भाई को सबक सिखाना था।इसके लिए वो कुछ भी करने के लियेबतायर थी और वो इसमें कामयाबी का पहला चरण पार कर चुकी थी।

अगले दिन सुहानी ने सबको एक्क् और झटका देने का प्लान कर चुकी थी…वो अपनी नयी कार लेके घर पहूंची….सब ये देख के हैरान थे…नीता को बहोत गुस्सा आया क्यू की सुहानी कुछ जादा ही मनमानी कर रही थी। सोहन तो बौखला गया था। लेकिन अविनाश इसबार सबसे विपरीत खुश था।

नीता:- सुहानी ये क्या है…तुम् खुद कमा रही हो इसका मतलब ये नहीं की कुछ भी करती रहो…एक बार हमसे पूछ तो लेती।

सुहानी थोड़ी घबरा गयी..वो कुछ बोल पाती इसके पहले ही अविनाश बोल पड़ा…

अविनाश:- नीता क्यू डांट रही हो….उसने तो आज हमारा सर गर्व से ऊँचा कर दिया है….

सुहानी और बाकि सब लोग हैरानी से अविनाश कोंदेखते रहे।

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