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खूबसूरती और बद्सुरती-14

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समीर:- नहीं सच में होता है…ये सब चार दिवारी की बिच रहता है इसलिए पता नहीं चलता…

सुहानी को पता नहीं क्यू इन सब में इंटरेस्ट आने लगा था।

सुहानी:- मैं नहीं मानती…तुमने कभी किया है…

समीर:- नहीं…पर सच कहू मेरी एक कजिन है…बहोत सेक्सी है उसे। चोदने का मन करता है…

सुहानी:- ईईईई…मतलब तुम्हारी बहन के साथ चुदाई करने का…पागल हो क्या??

समीर:- क्यू तुम्हारे मन में कभी तुम्हारे भाई के लिए ऐसा ख्याल नहीं आया??*

सुहानी:- नहीं बिलकुल नहीं…

समीर:- यार तुम इतनी सेक्सी हो…तुम्हारा भाई तो जरूर तुम्हारे नाम की मुठ मरता होगा पक्का…अगर मैं तुम्हारा भाई होता तो कब का तुम्हे चोद चूका होता…

सुहानी:- छिईईईई…चुप करो कुछ भी बकवास कर रहे ही…

समीर:- हम्म अभी तो छी कर रही हो जब सच में होगा तब उछल उछल के चुदवाओगी भाई से…

सुहानी के आखो के सामने वो सिन आने लगा की उसका भाई उसे चोद रहा है…लेकिन अगले ही पल उसे याद आया की उसका भाई उससे सीधे मुह बात नहीं करता देखता तक नहीं…उसको शर्म महसूस होती है की उसकी बहन बदसूरत है वो क्या चोदेगा???

समीर:- ओह मैडम। कहा खो गयी…खयालो में ही भाई का लंड ले लिया क्या चूत में हा हा हा…

सुहानी:- चुप। बैठो बदमाश कही के…कुछ भी बोल रहे हो…

समीर को पता चल गया था की सुहानी को मजा आ रहा है इन सब बातो। में…

समीर:- अच्छा भाई नही तो तुम्हारे पापा ने *कभी तुम्हे उस नजर से देखा या छुआ है??

सुहानी:- नहीं पागल हो क्या…क्या बकवास कर रहे हो आज तुम??

समीर:- अरे यार ग़ुस्सा क्यू हो रही हो…बस पूछ रहा हु…

और कोण कोण है तुम्हारे घर में??

सुहानी:- सभी है…मामा चाचा उनके बेटे बेटिया…लेकिन सब दूसरे शहर में रहते है बहोत कम मिलना होता है…

समीर:- तो कभी उन्होंने *ट्राय नही किया तुमपे?

सुहानी:- नहीं…

समीर:- क्यू?

सुहानी:- क्यू की मैं खूबसूरत नहीं हु…सुहानी का दर्द आखिर शब्दों समीर के सामने आ ही गया।

समीर:-क्या?? कुछ भी…इतनी सेक्सी जिस्म है तुम्हारा इतनी मीठी आवाज है और खूबसूरत नहीं हो…ये कैसे हो सकता है?

सुहानी:- हा मैं बदसूरत हु…इसीलिए तुम्हे अपना चेहरा नहीं दिखाती..

समीर:- मन में..ओह्ह तो ये बात थी इसके ना मिलने और अपना चेहरा छुपाने के पीछे…लेकिन मुझे लगता है की ये झूठ बोल रही है…इतनी सेक्सी है यार ये…हा थोड़ी सावली है पर खूबसूरत नहीं ये मानने को दिल नहीं करता।

सुहानी:- कहा खो गए??

समीर:- अ..क..कही नहीं…मैं नही मानता…हा तुम थोड़ी सावली हो पर इससे कुछ फरक नहीं पड़ता…

सुहानी:- अरे सच में..

समीर:- ठीक है…लेकिन एक बात कहू..इससे कोई फरक नहीं पड़ता…मैं दावे के साथ कह सकता हु की अगर कोई तुम्हारा जिस्म देख ले वो तुम्हारे चेहरे की बदसूरती भूल के तुम्हे एक बार चोदने के लिए पागल हो जायेगा।

सुहानी:- रहने दो अगर मैं तुम्हे अभी अपना चेहरा दिखा दू तो तुम भाग जाओगे…

समीर:- नहीं भागूंगा…

सुहानी:- समीर ये सब कहने के लिए अच्छा लगता है पर मैं इस जिंदगी को जीती हु…मुझे पता लोग जब मुझे देखते है तो उनके चहरे के रिएक्शन से पता चलता है की मेरे बारे में क्या सोचते है…हा ये बात है की अगर मैं चेहरा स्कार्फ से ढक लू तो वो मेरी छाती और गांड को देख के लंड मसलने लगते है…

समीर:- देखा मैंने कहा था न…

सुहानी:- तुम समझे नहीं…वो सिर्फमेरा जिस्म देख के …लेकिन अगर साथ में चेहरा भी दिख जाये तो मुह फेर लेते है…

समीर:- सुहानी सच कहु तो मैं भी सुंदरता का पुजारी हु…पर मेरा मानना है की कोई भी लड़की अपनी अदाओ से किसी भी आदमी को अपना दीवाना बना सकती है..

सुहानी:- मानना अलग होता है…और हकीकत अलग….

समीर:- सुहानी मैं तुम्हे देखना चाहता हु…अभी

सुहानी:- नहीं समीर प्लीज…

समीर:-सुहानी तुमसे बात करके मैं इतना तो समज गया हु की तुम दुखी हो…लेकिन मैं भी अपनी बात प्रूव करना चाहता हु की चेहरे की सुंदरता से कुछ नहीं होता…

सुहानी:- समीर मैं तुम्हे अपना चेहरा दिखाउंगी लेकिन तब जब मुझे यकीन हो जायेगा की सच में तुम्हारी बात सही है…क्यू की तुम अपनी बात सच करने के लिए आज तुम झूठमूठ का दिखावा करो…

समीर:- सुहानी तुम आखिर चाहती क्या हो…

सुहानी:- मुझे नहीं पता…मैं बता नहीं सकती…मैं बस इतना चाहती हु की मैं जिससे सेक्स करू वो पुरे होश में रहे और दिल से मेरे साथ सेक्स करे…

समीर:- तुम यहाँ गलत हो सुहानी…देखो खूबसूरत लड़की की और कोई भी अट्रैक्ट हो जाता है…उन्हें कोई efforts लेना नही पड़ता…पर इस बात की कोई गारंटी नही होती की वो लड़की सेक्सी हो…हा लेकिन तुम सेक्सी हो…लेकिन तुम्हे लोगो को अपनी और अट्रैक्ट करने के लिए एफर्ट डालने पड़ेंगे।

सुहानी:- कैसे एफर्ट??

समीर:- अपनी अदाएं दिखानी पड़ेंगी…अपना जिस्म थोडा एक्सपोज़ करना पपड़ेगा ताकि लोगो को तुम्हारे सेक्सी जिस्म दिखाई दे और वो तुम्हारे जिस्म को पूरा देखने के लिए पागल हो जाय…

सुहानी:- हा ये तो मैं करती हु…और सच में लोग मेरी तरफ अट्रैक्ट भी हो जाते है पर बस उतने ही समय के लिए…

समीर:- तो अगली बार थोडा और दिखाओ…

सुहानी सोचने लगी” सच कह रहा है…पूनम के अंकल कैसे पागल हो गए थे…पर वो तो नशे में थे…पर उसके पापा नशे में नही थे…””

समीर:-तुम्हारे सामने example है…मैं तुम्हे पाने के लिए बेताब हुआ जा रहा हु सुहानी….मुझे फर्क नहीं पड़ता आज की तुम खूबसूरत हो या नहीं..

सुहानी:-समीर प्लीज मुझे थोडा टाइम और चाहिए…

समीर:- थिक् है सुहानी…लेकिन आज क्या ऐसेही सुखा सुखा सुलाओगी मुझे…

सुहानी:- नहीं मेरी जान…गिला करके सुलाउंगी

समीर:-तो शुरू करे??

सुहानी:-ओके…

समीर:- चलो तो फिर एक काम करते है…तुम मेरी वो कजिन बन जाओ…

सुहानी और समीर ये भाई बहन वाला रोल प्ले शुरू किया….सुहानी को पहले तो बहोत अजीब लगा पर बाद में उसे मजा आने लगा…वो अपने भाई को इमेजिन करने लगी थी….और ये सिलसिला जो शुरू हुआ तो रुका ही नहीं….अब सुहानी खुद इन्सेस्ट में इंटरेस्ट लेने लगी थी। वो खुद समीर को रोज अलग अलग तरीके इन्सेस्ट प्ले करने का सुझाव देने लगी थी।*

घर पे जब वो उसके भाई या पापा को देखती तो उसे समीर के साथ किये हुए प्ले याद आने लगते और वो शरमा जाती। वो अब अपने भाई और पापा और बाकि रिश्तोदारो में सिर्फ एक मर्द …सिर्फ एक लंड दीखता…अब वो अपनी चूत में सचमुच में एक लंड लेने के लिए उतावली हो गयी थी।

सुहानी हर पल सिर्फ चुदाई के बारे में सोचने लगी थी। लेकिन मन में हमेशा डर लगा रहता था तो ठीक से अप्रोच नही कर पाती।

ऐसेही सुहानी और समीर को मिले हुए दो हफ्ते हो गए थे। सुहानी और समीर अब फ़ोन पे भी बाते करने लगे थे। समीर जो की एक बहोत बड़ा कमीना था लेकिन उसके मन में सुहानी के लिये एक अलग जगह बन चुकी थी।

एक दिन समीर ने फिर से सुहानी को अपना चेहरा दिखाने को कहा…लेकिन हर बार की तरह सुहानी। ने मना कर दिया…लेकिन समीर जिद्द पे अड़ गया और उसने सुहानी से कह दिया की अब जब तक वो सुहानी को देख नहीं लेता तब तक उससे बात नहीं करेगा। वो उससे मिलना चाहता था। उसने कहा की वो उसे एक तस्वीर भेज दे और कल उसे मिलने आये। उसने उसे एक होटल का नाम बताया और कहा की वो सन्डे को वो उसका इंतजार करेगा।*

सुहानी असमंजस थी की क्या करे…आखिर उसने फैसला किया की वो अब समीर को अपना चेहरा दिखा देगी। और फिर सन्डे को सुबह सुहानी ने समीर को अपनी एक तस्वीर भेज दी….सुहानी बेचैन थी की क्या करे…उसका मन कही भी नहीं लग रहा था। वो समीर के फ़ोन का इंतजार करने लगी। लेकिन समीर का फ़ोन नहीं आया…सुहानी ने कई बार उसे फ़ोन करने के लिए फ़ोन उठाया पर हिम्मत नहीं जुटा पायी….सुहानी के मन में अजीब अजीब खयाल आने लगे….उसे लगा की समीर जो इतनी बड़ी बड़ी बाते कर रहा था वो भी औरो की तरह ही निकला…लेकिन फिर भी सुहानी ने उसककी बताई जगह जाने का फैसला किया….वो उस होटल में पहुंची….लेकिन समीर वहा नहीं आया था….वो उसका इंतजार करने लगी। 3 घंटे तक वो समीर का इन्तजार करति रही पर समीर नहीं आया। *वो उसका फ़ोन ट्राय करती रही पर वो स्विच ऑफ आ रहा था। वो समझ गयी की समीर अब नहीं आने वाला….उसे बहोत ग़ुस्सा आया…बहोत दुःख हुआ।

वो घर आ गयी…रात को वो स्काइप पे भी ट्राय किया मगर समीर वहा भी ऑनलाइन नहीं था। सुहानी ने फ़ोन किया लेकिन अभी भी उसका फ़ोन स्विच ऑफ ही था। सुहानी रोने लगी। बहोत देर तक रोती रही।*

फिर उसका मन ग़ुस्से से भर गया…”ये लोग समजते क्या है खुद को…इतना भी क्या गुरुर है इन सबको…समीर मेरा भाई…पापा…और बाकि लोग….मैं ऐसी हु तो क्या ये मेरी गलती है? भगवान ने मुझे ऐसा बनाया तो मैं क्या करू? क्या मैं इंसान नहीं हु? मेरे अंदर कोई फीलिंग नहीं है? मैं इनसब को इनकी गलती का अहसास करवा के रहूंगी.,.बदसूरती सिर्फ बाहरी होती है…मैं लोगो की ये सोच बदल के रहूंगी…चाहे मुझे इसके लिए कुछ भी क्यू ना करना पड़े…जो आजतक मेरी बदसूरती की वजह से मुझसे दूर भागते आ रहे है उन्हें अगर मैंने अपने पीछे पीछे नहीं घुमाया तो मेरा नाम सुहानी नहीं”

पता नहीं सुहानी के दिमाग में क्या चल रहा था….पर एक बात तो थी अब वो ऐसा कुछ कर गुजरने वाली थी जो किसीने सोचा भी नहीं होगा………..

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