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खूबसूरती और बद्सुरती-13

hindi sex stories दूसरे दिन सुबह जब सुहानी तैयार हो के पूनम के रूम में गयी वो जाग चुकी थी और उसकी रही सही पैकिंग कर रही थी। सुहानी भी उसकी हेल्प करने लगी। दोनों ऐसेही मस्ती मजाक करते हुए काम कर रहे थे। अभी दो घंटे बाद पूनम की फ्लाइट थी।

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दोनों निचे हॉल में आ गयी। सुहानी ने जब चाचाजी को देखा तो उसकी नजरे अपने आप ही शरमा के निचे की और चली गयी। चाचाजी भी उसकी और देख के शरारती मुस्कान अपने होठो पे ले आये।*

फिर नाश्ता करने के बाद आखिर वो घडी आ ही गयी जब पूनम को विदा होना था। पूनम ने। सुहानी को गले लगा लिया और दोनों ही रो पड़ी। पूनम की माँ ने। भीगी आँखों से दोनों को समझाया दोनों ने। आंसू पोछे पूनम को गाडी में बिठाते वक़्त सुहानी की हालत शब्दों में बयान करना मुश्किल था। क्यू की वो उसके लिये क्या थी ये सिर्फ वो ही जानती थी। वो पूनम की गाडी को तब तक देखते रही जब तक वो उसकी आँखों से ओझल नहीं हुई….जब वो अंदर अपना बैग लेने के लिए आयी तब चचाजी ने उसे दरवाजे में ही रोक लिया।

चाचाजी:- सुहानी…वो कल रात मुझे थोड़ी जादा ही हो गयी थी ना…

सुहानी:- जी…

चाचाजी:- मुझे तो कुछ भी याद नही आ रहा की मैं अपने कमरे तक कैसे पहोंचा…

सुहानी:- हा आप बिलकुल होश में नही थे…मन में…थैंक गॉड इन्हें कुछ याद नही…वरना मैं तो क्या क्या सोचे जा रही थी।

चाचाजी:- हा ना…अच्छा मौका था…

सुहानी:- किस चीज का?? सुहानी जानबुज के पूछा।

चाचाजी:- अ..वो..कुछ नही…आते रहना कभी कभी…अच्छा लगेगा…मन में..और मेरा काम भी तो बाकि है…वो उसकी चुचियो को घूरते हुए सोचने लगे।

सुहानी ने देखा की चाचाजी उसकी चुचियो को। घूर रहे है तो उसके होठो पे एक मुस्कान दौड़ गयी।

सुहानी:- जरूर अंकल…

चाचाजी:- चलो मुझे थोडा काम है मैं निकलता हु…

ऐसा बोल के वो चले गए…

सुहानी अंदर आके अपना बैग उठाया और पूनम के मम्मी को बाय बोला। पूनम की मम्मी ने उसे कहा की फ़ोन करते रहना..और मिलने आते रहना। पूनम की मम्मी की। आँखों में आंसू आ गए…सुहानी। ने उन्हें गले लगाया…तभी पूनम के पापा भी वही आ गए…सुहानी ने उन्हें भी बाय बोला और उनके पैर छु लिए। पूनम के पाप ने सुहानी को कंधो से पकड़ के उठाया और कहा…

पापा:- तुम पूनम की सबसे अछि दोस्त हो…हरदम उसके साथ रही हो…

सुहानी:- नहीं अंकल…साथ तो उसने दिया मेरा..वो नहीं होती तो पता नही मैं क्या करती…

पापा:- ह्म्म्म …चलो मैं तुम्हारे लिए गाड़ी मंगा देता हु…तुम्हे घर तक छोड़ आएगी।

सुहानी:- नहीं अंकल…मैं टैक्सी से चली जाउंगी…

पापा:-नहीं बेटा तुम रुको..पूनम के पापा ने एक ड्राईवर से कहा की सुहानी ओ घर छोड़ आये।

सुहानी दोनों को फिर से बाय। बोला पूनम की। मम्मी को गले लगाया तो पूनम। के *पापा ने भी। इसबार उसे गले लगा लिया। सुहानी को थोडा अजीब लगा क्यू *की उनका टच उसे कुछ अलग लगा। फिर भी उसने नजर। अंदाज किया।

सुहानी बाहर जाने लगी…और दरवाजे में से पलट के फिर से हाथ हिलाया कब उसकी नजर पूनम के पापा पे। पड़ी तो उसने देखा की वो उसकी। गांड को देख रहे थे। सुहानी को अब कुछ जादा ही अजीब लगा।

वो चली गयी।

इधर पूनम के पापा सोच रहे थे”अहहह कल जब इसकी चुचिया और गांड पे नजर गयी। है साला दिमाग से नही जा रही है…अब तकक इसकी। सूरत की वजह से देखने का दिल ही नहीं करता था लेकिन अब साला लंड खड़ा हो जाता है इसे देख के…मजा आएगा अगर ये एक बार चुद जाय मुझसे…लेकिन मुझे नहीं लगता कोई चांस है क्यू की ये तो अब यहाँ आने से रही…चलो कोई नहीं जब अगली बार पूनम आएगी तब देखते है।””

 

सुहानी कार में बैठी सोच रही थी की कल कैसे वो पूनम के चाचा के साथ क्या क्या कर रही थी। और आज उसके पापा…नही ..नहीं…वो ऐसेही मेरा वहम होगा..वो ऐसा नहीं सोच सकते…मेरा न दिमाग ख़राब हो गया है…जब से ये सेक्स का चस्का लगा है…हर मर्द में बस वही दिखाई दे रहा है….नहीं यार आज जब हग क्किया तो कैसे कस के अपनी तरफ खिंचा था…और टच तो मैं पहचानती हु ही…जैसा अंकल का टच था कल रात को बिलकुल वैसेही …ये सोचते सोचते वो घर पहोच गयी थी।

रात को समीर के साथ वेबकेम दोनों ने फिरसे एक दूसरे को नंगा देख के मुठ मारी। अब ये उनका रूटीन हो चूका था। सुहानी बहोत खुश थी। समीर उसे रोज नए नए तरीको से खुश कर रहा था। सुहानी के दिमाग में अब बस सेक्स ही सवार रहता था। जब भी ऑफिस जाती तब उसकी नजर हमेशा उसके साथ काम करने वालो पे रहती। वो ऑफिस में अब टाइट कपडे पहनके जाने लगी थी जिससे उसका चुचिया और गांड लोगो को आकर्षित करे….और वो हो भी रहा था। जो लोग उसे नजर भर देखना भी पसंद नहीं करते थे वो अब उसकी हिलती हुई चुचिया और मटकती गांड को देख के अपना लंड मसलने लगे थे। सुहानी उनके लंड का उभार देख मन ही मन खुश हो जाती। सुहानी अब ऐसे ककपदे पहनती जिसमे उसकी चुचिया दिखाई दे जाती। वो कभी कभी जानबुज के निचे झुक जाती जिससे उसके आजु बाजू के लोगो को उसकी ब्रा तक दिखाई दे जाती। सुहानी का ये बदला हुआ रूप देख के ऑफिस में सब अचंभित थे। खासकर लडकिया क्यू की कुछ लोगो का फोकस अब उनसे हटकर सुहानी पे शिफ्ट होने लगा था। सुहानी ने एक दो बार उनकी बाते भी सुनी जिसमे वो कह रही थी की इतनी बदसूरत लड़की भी हवस के पुजारी ऑफिस के लोग कैसे ताड़ते रहते है…तो दूसरी जवाब देती की क्यू ना ताड़े उसकी फिगर है ही इतनी कातिल और आजकल वो भी तो सबको दिखती घूम रही है। ये सुन के सुहानी दुःख भी हुआ और ख़ुशी भी और ये सब समीर की वजह से था। वो ये सब उससे डिस्कस करती थी। समीर को क्या था वो तो बस मजे करना चाहता था।समीर उसे हमेशा मिलने के लिए कहता और अपना चेहरा दिखाने के लिए मिन्नतें करता पर सुहानी हर बार टाल देती और उसे धमकी देती की उसे जादा फ़ोर्स किया तो चाट करना बंद कर देगी…समीर ये सुन के चुप हो जाता।*

सुहानी और समीर रोज रत को एक नए तरीके से चाट करते थे…हर रोज एकक नया रोल प्ले करते थे।कभी टीचर का कभी हस्बैंड वाइफ कभी हस्बैंड फ्रेंड कभी बस में अनजान के साथ मस्ती …ऐसे बहोत सारे। सुहानी की मस्त कट रही थी…..लेकिन एक दिन सुहानी और समीर के बिच कुछ ऐसी बात हुई जिससे सुहानी की जिंदगी हमेशा के लिए बदल गयी वो हुआ यु की…..

 

एक दिन जब दोनों चैट कर रहे थे तब समीर ने पूछा…

समीर:- बोलो जानेमन आज कोनसा रोल प्ले करे…

सुहानी:- तुम जो बोलो….

समीर:- तुम्हे इन्सेस्ट रोल प्ले पसंद है??

सुहानी:- ये क्या होता है??

सुहानी को नहीं मालूम था की ये इन्सेस्ट क्या होता है।

समीर:- तुम्हे नहीं पता?? अरे जब रिश्तों में ही चुदाई होती है उसे इन्सेस्ट कहते है…

सुहानी:- रिश्तों में मतलब??

समीर:- जैसे मामा भांजी…माँ बेटा…बहन भाई…बेटी और पापा…ऐसे..

सुहानी:- छी….ऐसा भी कभी होता है??

समीर:- अरे बिलकुल। होता है…

सुहानी:- कुछ भी…सिर्फ कल्पनायें होती होंगी…

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