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खूबसूरती और बद्सुरती-11

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सुहानी:- अच्छा?? ऐसा क्या ख़ास करते हो आप??

 

चाचाजी:- वो तो जब तुम्हारी। मालिश करूँगा तब पता चल ही जाएगा…

 

सुहानी:- फिर भी कुछ तो ख़ास होगा…

 

चाचाजी:- मेरे पास स्पेशल क्रीम है…उसे लगा के मालिश करो तो उससे मजा भी आता है और बड़े भी होते है।

 

सुहानी को ये समझा नहीं।

 

सुहानी:- तो मुझे दे दीजिये…मैं खुद कर लुंगी।

 

चाचाजी:- वो ऐसे नहीं दे सकता…उसके लिए पहले बहोत कुछ करना पड़ता है…

 

सुहानी:- अभी नही है क्या आपके पास…खत्म हो गयी??

 

चाचाजी:- बहोत है…और वो कभी खत्म नही होती…बहोत भरी हुई है बोतल…

 

चाचाजी अपना लंड दबाते हुए बोले…फिर एकदम से सुहानी को क्लिक हुआ की वो किस क्रीम की बात कर रहे है।

 

सुहानी को समीर का झड़ना याद आ गया।

 

सुहानी:-तो निकालिये ना बोतल से…सुहानी बहोत ही मादक तरीके से बोली…अब उसका मुड़ भी शरारती हो चूका था।

 

चाचाजी:- बोतल बहोत दिनों से बंद है…जाम हो चुकी है…क्रीम निकलने के लिए…उसे हिलाना पड़ेगा…या हो सकता है चूसना भी पड़े…

 

सुहानी चूसना सुनके एकदम चौक पड़ी।

 

सुहानी:- मन में उफ्फ्फ ये क्या बोल रहे है उम्म्म्म मेरी चूत तो फड़फड़ाने लगी है स्सस्सस्सस और उनका लंड भी कबसे खड़ा है और ऐसे मसल रहे है मेरे सामने अह्ह्ह्ह्ह

 

वो आगे कुछ बोल पाती…तभी सुहानी का फ़ोन बजने लगा। वो अंदर गयी और फ़ोन पे बात करने लगी। इधर चाचाजी अब बेसबरे हुए जा रहे थे। उन्होंने और एक पेग लिया और एक ही झटके में पि गए। इधर सुहानी अपने मम्मी से बात कर रही थी और इधर चाचाजी ने एक और पेग खत्म किया। लाघबघ 10 मिनट हो चुके थे। चाचाजी पर अब शराब काफी हावी हो चुकी थी। इतनी देर बाद सुहानी वापस नहीं आयी ये देखने के लिए चाचाजी भी रूम में चले गए। सुहानी ने देखा की चाचाजी रूम में आ रहे है तो उसने मम्मी से कहा की वो अब फ़ोन रख रही है। चाचाजी अब अपने होशो हवास में नहीं थे। *सुहानी ये देख के समझ गयी की चाचाजी कको शराब कुछ जादा ही चढ़ गयी है।

 

सुहानी:- अंकल मुझे लगता है आपको अब अपने रूम में जाना चाहिए।

 

चाचाजी:- नशे में…ओह्ह क्यू??

 

सुहानी:- आपको जादा हो गयी है। चलिए मैं आपको रूम तक छोड़ आती हु।

 

ले जाइए यहासे…और वो उनकी तरफ पीठ करके खड़ी हो गयी…उसे लगा की उसके ऐसे ग़ुस्से से बोलने के बाद चाचाजी चले जायेंगे लेकिन चाचाजी चलते हुए उसके पास आये और उसकी कमर में अपना हाथ डाल के पिछेसे सुहानी को अपनी तरफ खीच लिया अपना लंड उसकी गांड पे दबाते हुए उसके गले को किस ककरन लगे। सुहानी ने उनके हाथ पकड़ लिए और छुटने की कोशिस करने लगी। पर चाचाजी उसके गले को चूम रहे थे अपनी जुबान से चाट रहे थे उससे सुहानी के तन बदन में आग लगने लगी। उसका विरोध कम होने लगा। उतने में चाचाजी ने अपने हाथ ऊपर सरकाते हुए उसकी चुचियो पे रख दिया और उसे मसलने लगे।

चाचाजी:- अह्ह्ह्ह सु..सुहानी उम्म्म कितनी बड़ी और सख्त चुचिया है तुम्हारी उम्म्म्म

सुहानी को अपनी चुचियो चाचाजी के हाथो का स्पर्श बहोत अच्छा लग रहा था वो उनके हाथो पे अपना हाथ बस रख के आँखे बंद करके मजा लिए जा रही थी अपनी गांड को अपने आप ही चाचाजी के लंड पे धीरे धीरे राउंड राउंड घुमाने लगी।

दीजिये अह्ह्ह्ह स्स्स्स मत…उह्ह्ह्ह धीरे मस्लिये उम्म्म्म

सुहानी वासना की दुनिया में लगबघ खो चुकी थी। वो बीएस आँखे। बंद किये आगे क्या होने वाला है इसीका इंतजार कर रही थी। चाचाजी ने *अपना हाथ उसके टॉप के अंदर घुसाया और ब्रा के ऊपर से सुहानी की चुचिया मसलने लगे। सुहानी को एक सुखद सा झटका लगा।

सुहानी:-स्स्स्स अह्ह्ह्ह्ह अंकल

चाचाजी:- अह्ह्ह्ह्ह सुहानी उम्म्म्म्म्म

चाचाजी के दोनों हाथ सुहानी के दोनों चुचियो को दबा रहे थे। सुहानी को उनके हाथो का स्पर्श अपनी आधी चुचिया जो ब्रा से बाहर थी उसपे हो रहा था। उसके मुह से आनंद भरी सिसक निकल रही थी। तभी चाचाजी ने अपना एक हाथ निचे लिया और सुहानी की चूत पे रखा….सुहानी को एक तेज झटका लगा और मुद गयी अनजाने में चाचाजी कको धक्का दे दिया….चाचाजी इसके लिए तैयार नहीं थे शराब उंनपे पूरी तरह हावी हो चुकी थी। वो धड़ाम से बेड पे गिर गए…. वो उठाने की कोशिस करने लगे लेकिन उठ नहीं पाये….वो सिर्फ सुहानी उम्म्म्म्म अह्ह्ह सुहानी चोदने दो ना एक बार अह्ह्ह्ह्ह ऐसा बोलते हुए और भी कुछ बड़बड़ाते हुए बेहोश से हो गए।

सुहानी थोडा घबरा गयी और दौड़ के उनके पास गयी और उन्हें हिलाने लगी। लेकिन वो अब होश में नहीं थे।

सुहानी:- सोचने लगी…उफ्फ्फ ये तो यही सो गए…अब क्या करू?? इनको उठा के ले नही जा सकती अकेली…और अगर ये यही रहे तो प्रॉब्लम हो जायेगी…

वो फिर से उन्हें उठाने लगी लेकिन कोई फायदा नहीं था। वो बेड के पास अपने सर पे हाथ रख के खड़ी हो गयी और सोचने लगी….तभी उसका ध्यान चाचाजी के पजामे में बने तम्बू की तरफ गया….उनका लंड अभी भी खड़ा था।

सुहानी को अचरज हुआ ये देख की अभी उनका लंड खड़ा था। वो गौर से देखने लगी। उसे पजामा थोडा गिला गिला दिखा वो थोडा नजदीक जाके देखने लगी….थोडा झु क के देखा तो उसे प्रीकम की महक आने लगी उसे वो बहोत ही अछि लगी तो थोडा और झुकी।

सुहानी:- अह्ह्ह्ह स्स्स कितनी अच्छी खुशबु है ….खुद तो बेहोश पड़े है पर ये अभी भी तन के खड़ा है….हाथ लगा के देखु क्या??…नहीं नहीं…पागल हो क्या…अरे ये तो बेहोश है क्या पता चलने वाला है…

सुहानी थोडा असमंजस में थी….वो उनके पास बैठ गयी और गौर से उनका लंड देखने लगी। सुहानी ने चाचाजी की तरफ देखा और अपना हाथ उनके लंड की तरफ ले गयी उसके हाथ काँप रहे थे। उसने अपना हाथ लंड पे रखा और झट से खीच लिया…उसे धड़कन तेज हो रही थी। उस खामोश कमरे में सर उसकी तेज सांसे और धडक्नो के अलावा कोई भी आवाज नहीं आ रही थी। उसने एक बार *चाचाजी की तरफ देखा और फिर से धीरे धीरे अपना हाथ बढ़ने लगी….उसने अब चाचाजी के लंड पे हाथ रख दिया था। वो थोडा नरम हो चूका था…उसने धीरे धीरे उसे एक दो बार दबाया…उसे लंड को छूना बहोत अच्छा लग रहा था। कल उसने समीर का लंड देखा था और आज वो चाचाजी का लंड छु रही थी।*

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