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खूबसूरती और बद्सुरती-8

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चाचा ने उसे। छोड़ दिया…सुहानी को नशा बहोत कम हुआ था। पर पहली बार था इसलिये थोडा अजीब लग रहा था एयर मजा भी आ रहा था।

वो दोनों जेक रेलिंग के पास खड़े हो गए…चाचा सुहानी के चहरे के हावभाव देख रहा था। और साथ हिउसक्के सेक्सी बदन को नशे में सुहानी थोड़ा थोडा बलखा रही थी।

चाचा:- मन में…उफ्फ्फ क्या सेक्सी लग रही है….सिर्फ चेहरा ठीक होता तो न जाने कितनो का पानी निकालती ये…

सुहानी:- मन में…मुझे बहका के मजे लेनेकी सोच रहे है…उफ्फ्फ मुझे पता है फिर भी मैं क्यू इसे एंटरटेन कर रही हु….क्यू की इनका अटेंशन मुझे अच्छा लग रहा है…वो जिस हवस भरी नजरो से मुझे देख रहे है वो मुझे अच्छा लग रहा है….मुझे अबतक नहीं पता था की मेरे पास भी ऐसा कुछ है जिससे लोग मेरी तरफ अट्रैक्ट होते है…देखो कैसे अपने लंड को मसल रहा है मेरी चुचिया और गांड देख के…चलो इसको थोड़े और जलवे दिखाते है और थोडा तड़पाते है।

चाचाजी ने देखा की सुहानी की नजर उसके लंड पे है तो उसने हाथ हटा लिया।

सुहानी ने उसकी तरफ देखा और स्माइल कर दी…वो भी स्माइल करने लगा।

सुहानी:- वाओ अंकल ये गार्डन कॉटन अच्छा लग रहा है रात में…

चाचाजी:- अरे ये तो कुछ नहीं…उस साइड का देखना कितना अच्छा लगेगा जब काम पूरा हो जायेगा…ऐसा बिल के वो सुहानी के पास आये और उसके कंधे पे हाथ रख दिया…और उसे बताने लगे की वहा क्या क्या करने वाले है…सुहानी का ध्यान उसके बातो में कम हाथो पे जादा था। उसने सुहानी को कंधे से पकड़कर थोडा अपनी और खीचा….वो दोनों सामने के तरफ मुह करके खड़े थे। वो धीरे धीरे कंधे को दबा रहा था। सुहानी पे उसका असर होने लगा था। फिर धीरे से चाचाजी ने अपना हाथ उसकी पीठ पे ले आये….आराम से बाटे करते हुए उसकी पीठ सहलाने लगे….सुहानी को अहसास हो रहा था…वो मजे ले रही थी…वो बस देखना चाहती थी की चाचाजी और क्या क्या करते है…चाचाजी धीरे धीरे अपना हाथ निचे लेके जा रहे थे अब उनका हाथ उसकी कमर पर था। टॉप शार्ट था…और पैंट और टॉप में थोडा गैप भी था। उस गैप में चाचाजी का हाथ जाते ही उन्हें उसकी नंगी कमर फील हुई….उनका हाथ वाही रुक गया…वो सुहानी के चहरे की और द्वलहने लगे…दोपहर में कैसे वो झटके से बाजू सरक गयी थी वो यद् आ गया…पर इसबार ऐसा कुछ नहीं हुआ….सुहानी मंद मंद मुस्कुरा रही थी।

सुहानी:- अच्छा प्लान है अंकल…

चाचाजी:- हा..बेटा वो तुम्हारी चाची को पसंद है ये सब…

सुहानी:- कितना सोचते हो आप आंटी के लिए…

चाचाजी:- अब बीवी है तो सोचना ही पड़ता है…जब चाचाजी ने देखा की सुहानी पे शराब का असर कुछ खास नहीं हुआ तो…तुम और पीना चाहोगी??

सुहानी :- नहीं अंकल…बस हो गया…ये ही तो मुझे बहोत हो गयी…मेरा सर चकरा रहा है…

चाचाजी:- मन में…थोड़ी देर के बाद पिला दूंगा…अब थोड़ी बाते करते है। वो बाते करने लगे लेकिन उसने पपन हाथ नहीं हटाया था। सुहानी को भी उनका छूना अच्छा लग रहा था। उनके हाथ का गरम स्पर्श अपनी नंगी कमर पे पा कर सुहानी की चूत चुलबुलाने लगी थी।

पहली बार कोई मर्द उसे इसतरह छु रहा था। चाचाजी का तो बुरा हाल था…एक तो शराब का नशा और ऊपर से सुहानी के इतने करीब होने से उसके जिस्म की खुशबु उसे पागल कर रही थी। वो अब थोडा अपना हाथ टॉप के थोडा अंदर सरकाया…और अपना पूरा पंजा उसकी कमर को पकड़ लिया। सुहानी के मुह से हलकी सी आह्ह निकल गयी।

चाचाजी:- क्या हुआ??

सुहानी के होठो पे एक शर्मीली मुस्कान आ गयी…

सुहानी:- कुछ नहीं…

चाचाजी समझ गए की लड़की गरम हो रही है…फिर भी वो जल्दबाजी नहीं करना चाहते थे। वो हल्का हल्का अपने हाथ का दबाव उसकी कोमल कमर पे डालने लगे और सहलाने लगे। वो उसे और गरम करना चाहते थे।

चाचाजी:- कितना अच्छा मौसम है…

सुहानी:- हा…बस अब कुछ दिन…फिर तो समर शुरू हो जाएगा…

चाचाजी:- हा…विंटर का सीजन मुझे बहोत पपसंद है…बहोत मजा आता है…

सुहानी:- मतलब?? कैसा मजा?

चाचाजी:- वो..वो..तुम नहीं समझोगी….तुम्हारी शादी नहीं हुई है ना…पूनम से पूछ लेना…

सुहानी समझ गयी की चाचाजी क्या कहना चाह रहे है।

सुहानी:- इसका शादी से क्या कनेक्शन??

चाचाजी:- हा वो भी है…शादी जरुरी नहीं है….चाचाजी उसकी आँखों में देखते हुए बोले तो सुहानी शर्म से पानी पानी हो गयी…

सुहानी:- हा जिसकी शादी नहीं होती वो विंटर का मजा नहीं लेते क्या?? सुहानी जानबुज ककए बोला।

चाचाजी:-हा बिलकुल लेते है…और लेना भी चाहिए…चाचाजी उसकी कमर को सहलाते हुए अपना हाथ उसकी गांड की और बढ़ाते हुए बोले।

सुहानी अब बहोत गरम हो चुकी थी।

सुहानी:- मन में…उफ्फ्फ अंकल तो मेरी आग को बहोत ही भड़का रहे है…बहोत मजा आ रहा है उम्म्म्म्म्म्म्म

चाचाजी ने अब अपना हाथ उसाकि गांड पे रख दिया था।

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