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bewafa ki chudai -1

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सुबह अपनी तैयारी करके, मैं ऑफिस जाने की तैयारी कर ही रहा था के तभी फोन की रिंग बजी।

मैंने फोन उठाया सामने से एक लडकी की आवाज आयी – क्या, मैं रविराज जी से बात कर सकती हूँ .?.

मैं – बोल रहा हूँ आप कौन हो .?.

कॉलर – रवी मैं कोमल हूँ, कोमल वर्मा… तुम्हारी कालेज फ्रेंड…

मैं – कोमल वर्मा, कलकत्ते वाली .?.

कोमल – हाँ…

मैं – तुम्हें मेरा नंबर कैसे मिला .?.

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कोमल – टेलिफोन डिरेक्टरी से

मैं – इतने सालों बाद कैसे याद किया .?. कहा हो आज कल .?.

कोमल – कलकत्ता में ही हूँ।

मैं – कैसी हो .?. क्या करती हो .?.

कोमल – रवी ! मैं तुमसे मिलना चाहती हूँ।

मैं – कहाँ .?. क्या तुम मुंबई आयी हो .?.

कोमल – नहीं पर तुमसे मिलने के लिये आ सकती हूँ।

मैं – इतना क्या इम्पॉर्टंट काम हैं के तुम सिर्फ मुझसे मिलने के लिये मुंबई आना चाहती हो .?. सब ठीक तो हैं ना .?.

कोमल – नहीं रवी सब ठीक नहीं हैं।

मैं – अच्छा एक काम करते हैं। अगले हफ्ते मैं कलकत्ता आ रहा हूँ, तब वही मिल लेंगे।

कोमल – ठीक हैं, पर मिलना जरुर। किसी वजह से यहाँ नहीं आ पाये तो मुझे बुला लेना, मैं आ जाऊंगी।

मैं – कोमल लगता हैं किसी बडी मुसिबत में हो।

कोमल – कुछ ऐसा ही समझ लो..

मैं – क्या प्रॉब्लेम हैं बताओ, शायद मैं यहीं से तुम्हारी प्रॉब्लेम सॉल्व कर दू।

कोमल – नहीं रवी मेरी प्रॉब्लेम फोन पर बताने लायक नहीं हैं, इसके लिये फेस टू फेस मिलना जरुरी हैं।

मैं – ठीक हैं, अगले हफ्ते मिलते हैं। तुम अपना नंबर दे दो, मैं वहा आके तुम्हें कॉल कर लुंगा।

उसने अपना नंबर बताया थँक यू कहा और फोन रख दिया।
एक हफ्ते बाद मैं अपने काम से कलकत्ता पहुँच गया।

मैं सुबह की फ्लाइट से गया था, काम खत्म करके शाम की फ्लाइट से वापस आनेवाला था। इसलिये काम खत्म होते ही मैंने कोमल को फोन किया।

दोपहर के वक्त दरवाजे पर नॉक हुयी, मैंने दरवाजा खोला सामने कोमल खडी थी। थोडी देर मैं उसकी तरफ देखता ही रहा।

कोमल कॉलेज के जमाने से ही गदराये बदन की खुबसुरत लडकी थी। आज भी वो उतनी फिट और खुबसुरत लग रही थी।

कंधे पर झुलते घने काले बाल, हल्की भवों से निहारती नशिली आँखे, गोरा सफेद दुध जैसा रंग, भरा हुआ कसा बदन, उस कसे हुये बदन के सिने पर दो बडे बडे नारियल जैसे बुब्स।

ऐसा लग रहा था के मैं खजुराहो की किसी तराशी हुयी सुंदर कला को देख रहा हूँ। हाला के हम कॉलेज में अच्छे दोस्त थे, पर कोमल को मैंने इतनी सेक्सी अदा में तब नहीं देखा था।

कोमल – सिर्फ देखते ही रहोगे के अंदर भी बुलाओगे .?.

कोमल के टोकने पर मैं होश मे आ गया।

मैं – सॉरी सॉरी प्लीज आ जाओ…

कोमल – जितना निहार के अभी देख रहे थे, उतना अगर कॉलेज के वक्त देखते तो तुमसे ही शादी करती।

गलती हो गई, मैंने हसते हुये कहा। मेरी बात पर वो भी हस दी।

मैं – कुछ लोगी खाने पिने को .?.

कोमल – नहीं, मैं बस बात करना चाहती हूँ।

मैं – कहो ऐसी क्या जरुरी बात हैं .?.

कोमल – कैसे कहू…..

मैं – कोमल कोई बहुत बडी प्रॉब्लेम हैं क्या .?.

कोमल – हाँ रवी, अॅक्चुअली प्रॉब्लेम मेरी शादीशुदा जिंदगी से हैं।

मैं – ओह ! पती अगर कुछ जुल्म करता हैं तो अपने घरवालों को बताओ, उनकी मदद लो।

कोमल – नहीं रवी ! मैं इस मामले में घरवालों की मदद नहीं लेना चाहती।

मैं – ओ आइ सी ! क्या करता हैं मारता पिटता हैं .?.

कोमल – मारता पिटता तो सह भी लेती लेकिन….

मैं – कही बाहर अफेयर है उसका .?.

कोमल – बाहर नहीं, अंदर। घर के अंदर।

मैं – क्या .?. यू मिन टू से इसेस्ट .?.

कोमल – नहीं घर में हम दोनों ही रहते हैं।

मैं – फिर .?.

कोमल – ओ रोज एक नयी लडकी लाता हैं और मेरे सामने ही….

मैं – वो माय गॉड ! तुम्हें तो पुलिस की मदद लेनी चीहिये।

कोमल – नहीं ले सकती।

मैं – क्यों .?.

कोमल – कुछ गलतियाँ मुझसे भी हुयी हैं।

मैं – साफ साफ बताओ क्या मामला हैं।

कोमल – मेरे हसबंड के मॅनेजर से मेरे जिस्मानी ताल्लूकात थे। एक दिन हसबंड ने हमे रंगे हाथ पकड लिया।

मैं – फिर .?.

कोमल – वो ना गुस्सा हुआ ना मारा पिटा। ना किसी को ये बात बतायी, पर दूसरे ही दिन से ओ घर में लडकियाँ लाने लगा और मेरे सामने ही उनसे सेक्स करने लगा।

– इसका मतलब ओ तुमसे बेवफाई का बदला ले रहा हैं .?.

कोमल – हाँ, ऐसा बदला के मैं उसे रोक भी नहीं सकती।

मैं – तुम्हें कुछ तो अॅक्शन लेनी चाहिए। जो तुमने किया वो गलत सही पर जो वो कर रहा हैं वो भी सही नहीं।

कोमल – अॅक्शन ली मैंने, झगडा किया उसके साथ।

मैं – फिर .?.

कोमल – नुकसान फिर भी मेरा ही हुआ। अब वो खुद बाहर जाने लगा हैं, घर पर नहीं करता कुछ।

मैं – डिवार्स दे दो

कोमल – नहीं, मैं उसे डिवॉर्स नहीं देना चाहता।

मैं – फिर क्या करना चाहती हो .?.

कोमल – मैं उसकी जासूसी करना चाहती हूँ।

मैं – पर इसका क्या फायदा होगा .?. ना तुम उसे छोडना चाहती हो, ना उसकी कंम्पलेंट करना चाहती हो .?.

कोमल – मैं हर वक्त उसे जताना चाहती हूँ के मैं उनपर नजर रख रही हूँ।

मैं – उससे क्या होगा .?.

कोमल – वो कभी तो शर्मसार होगा अपनी हरकतों से .?.

मैं – उसे शर्म आनी होती तो पहले ही आ जाती। अब कोई फायदा नहीं होगा।

कोमल – ट्राई तो कर सकते हैं, प्लीज मेरा साथ दो ना।

मैं – ठीक हैं, हम किसी जासूस को उसके पीछे लगा देते हैं।

कोमल – हाँ, पर जब वो किसी औरत के साथ सेक्स कर रहा होगा तब वो जासूस वहाँ नहीं होना चाहिए। रहेंगे सिर्फ हम दोनों।

मैं – बडा अजीब लग रहा हैं ये सब।

कोमल – प्लीज अब कोई चेन्जेस मत करना प्लान में।

ह ! ठीक हैं कहते हुये हमारी बातचित बंद हो गई।

थोडी देर बाद कोमल अपने घर चली गई।

कहानी जारी रहेगी…

कहानी के बारे में आपके जो भी अच्छे सुझाव हो आप मुझे मेल कर दीजिये। फाल्तू मेल में आपका और मेरा किमती वक्त जाया मत होने दीजिये।
मेल करते वक्त कहानी आपने किस साइट से पढ़ी कहानी का टाइटल क्या हैं और आपको उसका कौनसा हिस्सा पसंद आया ये बता देंगे तो मेल का उद्देश समझ में आयेगा।

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admin
Updated: October 6, 2018 — 7:11 am

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